मोहिनी विधा साधना और सिद्धि हिंदी पुस्तक Mohini Vidya Sadhana aur Siddhi by A.L. Bhagavat – Gyan Vilas Press Puna

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मोहिनी विद्या

अभी तक जिन साधनाओं की चर्चा में कर चुका हूँ। उनके कुछ ही महिनों के अभ्यास के बाद साधक की इच्छाशक्ति बहुत ही बढ़ जाती है। अपने मन पर अधिकार प्रस्थापित करने के बाद साधक दूसरों के मन पर अवश्यमेव अधिकार प्रस्थापित कर सकता है। मन की इस इच्छाशक्ति (Will-prwwver) के सहारे संमोहित व्यक्ति के द्वारा अनेक आश्चर्यकारक बातें की जा सकती है।

अर्थात् इस विद्या का उपयोग केवल ऐसे चमत्कार दिखाने के लिए करना योग्य नहीं। इस के प्रयोग से मानसिक मीठाएँ, निद्रानाश, युरी आषरों, शरीर की कुछ पीडाएँ, मन की दुर्बलता आदि को दूर किया जा सकता है। इस दिव्य विद्या की साधना इसी हेतु की जाम ऐसी मेरी सलाह है।

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जनसाधारण में मोहिनी विप्रा के बारे में मीलों गलत फहमियाँ फैली हुई है। यह विद्या जादूटोना, जारन-मारन अथवा इंद्रजाल आदि का एकाद प्रकार होगा और उसको प्राप्त करने के लिए कुछ घृणास्पद ( अघोर अथवा औपड़ ) उपायों का अपनाना पड़ेगा, ऐसा बहुत से लोग समझते हैं। कुछ लोक समझते हैं कि यह विद्या अन्य व्यक्ति को सुलाने को एक विद्या है। मोहिनी विधा साधना और सिद्धि हिंदी पुस्तक Mohini Vidya Sadhana aur Siddhi by A.L. Bhagavat – Gyan Vilas Press Puna

अन्य व्यक्ती को निद्रिस्त करना यह मोहनी विद्या का एक अंग है। लेकिन मही एकमेव वात यानी मोहिनी विद्या इस प्रकार कहना गलत है। निद्रिस्त करने के सिवाय भी किसी भी व्यक्ति को इस विद्या के आधार पर गा में लाया जा सकता है।

संमोहनशास्त्र अर्थात् मोहिनी विद्या का इतिहास लिखना मेरा उद्देश्य नहीं है। अन्य ग्रंथों में यह इतिहास बाप पढ़ सकते हैं। इस ग्रंथ में मैंने तीन बातों का जिक्र किया है : मोहिनी विद्या के प्रयोग कैसे करें ? मेरे अनुभव की कुछ आश्चर्य कारक बारों और रोग निवारण अथवा व्याधिमुक्ति ।

पहले भी कह चुका हूँ कि कोसे जाने पर हम दूसरों के मन पर अधिकार प्रस्थापित करने में सफल हो जाते हैं। इच्छाशक्ति के साथ साथ अपनी आँखों में से भी एक अलौकिक रोज प्रकट होना चाहिए। प्राणा ग्राम-त्रिया और दर्पण त्राटक के द्वारा इच्छाशक्ति ( Will-power) का असीम विकास हो जाता है और आंखों में से रोपानी बरसने लगती है। ये दो बातें मोहिनी दिया की आधारशिलाएँ हैं। और इन दो यातों के साथ आत्मविश्वास को पैदा

करने पर सफलता अपने आप आ ही जाती है। फिर भी ऊपर जिनकी चर्चा मैने की है वे सिद्धियाँ साधक को प्राप्त हो रही है या नहीं इस बात को परखने के लिए कुछ प्रारंभिक क्रियाओं का ज्ञान मावश्यक है। मोहिनी विधा साधना और सिद्धि हिंदी पुस्तक Mohini Vidya Sadhana aur Siddhi by A.L. Bhagavat – Gyan Vilas Press Puna

रास्ता चलते समय जागे चलनेवाला व्यक्ति पीछे गूड़कर अपनी ओर देते इस संकल्प के साथ उसकी गर्दन पर अपनी नजर स्थिर रखिए। लेकिन इस संकल्प में मन संकित नहीं होना चाहिए। क्योंकि संपाला भी विचार का एक रूप (Thought forms) है और उसका स्थान मन होता है। शंकित होने पर वह विचार- रूप संकरण नष्ट भ्रष्ट हो जाता है जिस तरह मैं यता रहा हूँ, अगर आप भी उसी प्रकार यह विधि संगन करेंगे तो सामने रास्ता चलनेवाला व्यक्ति जरूर मुड़कर पीछे लेगा। प्रारंभिक स्थिति में इस विधि का फँस जाना स्वाभाविक है। मोहिनी विधा साधना और सिद्धि हिंदी पुस्तक Mohini Vidya Sadhana aur Siddhi by A.L. Bhagavat – Gyan Vilas Press Puna

आपका संकल्प इतना शक्तिशाली नहीं होता और उस संकल्प में आपका भरोसा भी कम रहता है। सफलता के लिए कुछ विधियों का बोहराने की संख्या भी निश्चित होती है। अगर किसी विधि की सफलता के लिए सीयार उसे दोहराने की आवश्यकता है, तो शौबार दोहराने के बाद ही साधक सफलता को हासिल करेगा। दस-बीस -पास बार मन करने पर अगर असफलता के कारण हम हिम्मत हार बैठेंगे तो कैसे चलेगा ? श्रम तथा अभ्यास की मंडी मात्रा में शीघ्र ही सफलता की ओर से जाती है। किसी एक साधना में एक बार सफल हो जाने पर, उसी में दूसरे वगत असफल हो जाना असंभव है

संमोहन शास्त्र: कुछ विशेष बातें

संमोहन धार में पहला कदम रखनेवाले साधकों को कुछ अनुभवसिद्ध और उपयुक्त वालों से परिचित कराना में उचित समझता हूँ । (१) मेरा अनुभव ऐसा है की सबेरे की अपेक्षा ग्राम के यगत संमोहन प्रयोग में अधिक सफलता मिलती है । जिस कमरे में आप प्रयोग करना चाहते है, वहाँ पूर्ण रूप से शांति और गंभीरता का वातावरण रहे। जहाँ इस वापर अविश्वास प्रमाष्ट करनेवाले तथा मजहिए लोग इकट्ठे हो गए हो, यहाँ इस विधि में सफलता पाना असंभव है। इसका कारण यह है कि ऐसी परिस्थितियों में में का मन एकाग्र नहीं होता । उसका मन उन मजाकिए लोगों के बारे में सोचता रहता है। मोहिनी विधा साधना और सिद्धि हिंदी पुस्तक Mohini Vidya Sadhana aur Siddhi by A.L. Bhagavat – Gyan Vilas Press Puna

उसी प्रकार उनके श्रद्धादिन विचारों से क्ष का मन भी प्रभावित हो जाता है । शादी-ब्याह या बौर किसी दायत के समय केवल मेजबानों गा अन्म मेहमानों के आग्रह का शिकार बनकर संमोहन का प्रयोग न करें। अगर कोई महिला कहती है। ” मैदाजी, आपका यह भान्जा घड़ा दीवान है। पढ़ाई पर बिलकुल ध्यान नहीं । जरा तो विद्या को अजमाइए ” तो उस भात को तुरन्त अस्वीकार कर देना चाहिए जहाँ आप संमोहन विद्या का प्रयोग करेंगे वहा धोरगुल का अभाव रहे। मोहिनी विधा साधना और सिद्धि हिंदी पुस्तक Mohini Vidya Sadhana aur Siddhi by A.L. Bhagavat – Gyan Vilas Press Puna

अगरबत्तियाँ जमा कर पातावरण को सुगंधित रक्षिए । धीमी आवाज वाला कोई ग्रामोफोन रिकार्ड हो तो भी उसे बनाइए । संगोहन प्रयोग के लिए किसी के घर न जाइए खुद के कमरे में बताया प्रयोग अधिक मात्रा में होता है।

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