Practical Hypnotism by Dr. Narayan Dutt Shrimali Hindi Book PDF free Download

Books detail / बुक्स डिटेल्स
| Book Name | Practical Hypnotism by Dr. Narayan Dutt Shrimali Hindi Book PDF free Download |
| Author Name | Dr. Narayan Dutt Shrimali |
| Category | Tantra mantra and Occult |
| Language | Hindi |
| Page | 67 |
| Quality | HQ |
| Size | 25.1 MB |
| Download Status | Available for Download |
📌 वेबसाइट पर सभी लिंक को अपडेट कर दिया गया है और पहले से ज्यादा फ़ास्ट डाउनलोड भी हो रहे है. अगर कोई लिंक है जो अपडेट नहीं हुआ है तो आप हमें सूचित करे हम इसे बदल देंगे। लिंक के लिए कमेंट करे.
All links on the website have been updated, and downloads are now faster than before. If any link hasn’t been updated, please let us know, and we will replace it. Please leave a comment regarding the links.
दिव्य साधना संपन्न करने के लिए या दिव्य साधना में सफलता प्राप्त करने के लिए कुछ विशेष योग और आसन सहायक हैं।
ये कुल आठ आसन हैं और इन आठ आसनों को एक विशेष क्रम से करने पर वह अपने-आप में क्षमतायुक्त वन जाता है, जिससे उसे दिव्य साधना में सफलता मिल जाती है।
जब व्यक्ति दिव्य साधना में सफल हो जाता है तो वह अपने-आपको ज्यादा-से-ज्यादा जानने और अपने अंतर को ज्यादा-से-ज्यादा पहचानने में सफन्न हो जाता है, क्योंकि उसका अपने-आप पर नियंत्रण स्थापित हो जाता है।
इसके बाद वह व्यक्ति इस दिव्य साधना के आघात से वाह्य मन को विचारशून्य बनाने का प्रयत्न करता है और धीरे-धीरे उसे अनुभव होने लगता है कि वह पहले की अपेक्षा ज्यादा शांत हो सका है और पहले की अपेक्षा अपने-आप को ज्यादा हलका भी अनुभव करने लगा है। इसका प्रमाण यही है कि वह अपने वाह्य मन पर धीरे-धीरे नियंत्रण स्थापित कर रहा है।
कठिनाई तब आती है, जब इस बाह्य मन का संपर्क अंतर्मन से करना होता है, क्योंकि इन दोनों की अपने-आप में अलग सत्ता है और आपस में किसी प्रकार का संबंध नहीं है।
एक विशिष्ट क्रिया से इस बाह्य मन का संपर्क अंतर्मन से हो जाना है और जब यह संपर्क हो जाता है तो यह आवश्यक है कि यह संपर्क टूट न जाए, अपितु एक दूसरे से बराबर जुड़ा रहे।
जब यह संपर्क जुड़ जाता है और विशेष क्रिया से जुड़ा रहता है, तब मानव को अपने बाह्य मन के आघात से अंतर्मन को भी विचारशून्य बनाने की प्रक्रिया प्रारंभ होती है।
यद्यपि यह थोड़ी कठिन अवश्य है और इसके लिए सतत अभ्यास और क्रिया की आवश्यकता है, परंतु जब बाह्य मन पर नियंत्रण स्थापित हो जाता है तो अंतर्मन पर नियंत्रण स्थापित करना ज्यादा कठिन नहीं रहता और बाह्य मन के आघान से अंतर्मन को धीरे-धीरे विचारशून्य बना दिया जाता है।
“So, Monday. We meet again. We will never be friends—but maybe we can move past our mutual enmity toward a more positive partnership.” ―Julio-Alexi Genao






