मंत्र तंत्र साधना प. लक्ष्मी नारायण शर्मा बुक पीडीऍफ़ Mantra Tantra P. Laxmi Narayan Sharma Book PDF free Download

मंत्र तंत्र साधना प. लक्ष्मी नारायण शर्मा बुक पीडीऍफ़ Mantra Tantra P. Laxmi Narayan Sharma Book PDF free Download

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Books detail / बुक्स डिटेल्स

Book Nameमंत्र तंत्र साधना प. लक्ष्मी नारायण शर्मा बुक पीडीऍफ़ Mantra Tantra P. Laxmi Narayan Sharma Book PDF free Download
Author NameP. Laxmi Narayan Sharma
Category Tantra mantra and Occult
LanguageHindi
Page194
QualityHQ
Size43 MB
Download StatusAvailable for Download

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कुछ ज्योतिषियों के बारे में कहा जाता है कि वह फलादेश कहने में कर्ण- पिशाच जैसी किसी प्रेत सिद्धि का सहारा लेते हैं। यहां इस विषय पर भी कुछ बता देना जरूरी है। ऊपर जिन ओझा, सेबड़े, सयाने आदि का वर्णन किया है और आज के जमाने में जो काफी संख्या में मिल जाते हैं वे मन्त्रों द्वारा भूत प्रेत आदि सिद्ध करने वाले होते हैं।

इनमें भी बहुत से तो पाखण्डी व ठग होते हैं और उन्हें कोई भूत प्रेत की भी सिद्धि नहीं होती, परन्तु जिन्होंने सचमुच ही इस प्रकार की आत्माओं को सिद्ध किया होता है, वे निम्न स्तर के मन्त्रवेत्ता कहे जा सकते हैं। हमारी मान्यतामों तथा विश्वासों के अनुसार, जिन जीवों की व्यक्तियों की अकाल मृत्यु हो जाती है, आत्महत्या से, हत्या से, जल में डूबकर, आग से जलकर बड़े कष्ट से जिनके प्राण निकलते हैं और जिनकी आत्माएं अतृप्त रह जाती हैं, उनकी गति नहीं होती यानी वे वायुमंडल में अपने सूक्ष्म शरीर को लिये अपत्नी अतृप्त वासनायें लिये मंडराती रहती है और उनका पुनर्जन्म नहीं हो पाता ।

इनको भूतप्रेत योनि की संज्ञा दी गई है। आज के वैज्ञानिक युग में भी बहुत-सी ऐसी घटनायें प्रकाश में आ चुकी हैं जिनमें इनका अस्तित्व प्रमाणित हो चुका है। सूक्ष्म शरीर होने के कारण ये दिखाई नहीं देतीं परन्तु कभी-कभी कोई अधिक मनोबल वाली प्रेतात्मा छायारूप में दिखाई देकर अपने अस्तित्व का आभास करा देती हैं और ऐन-केन प्रकारेण कुछ हानि-लाभ करने में भी सफल हो जाती हैं। बहुधा यह कमजोर मनोवल वाले पुरुषों, स्त्रियों या बच्चों के शरीर में प्रवेश करके उस शरीर के द्वारा अपनी अतृप्त वासनाओं की तृप्ति करती भी पाई गयी हैं। क्योंकि यह सत्र समय सब जगह अवाध रूप से जा सकती हैं इसलिए भूत तथा वर्तमान का इन्हें पूरा शान रहता है और इनमें

भी जो अधिक मनोवल वाली होती है उनमें इतनी शक्ति भी होती है कि वह छाया शरीर धारण कर लें और वस्तुयों को एक स्थान से दूसरे स्थान सक स्थानान्तर कर सकें.

इस प्रकार की भूत प्रेत आत्माओं का सिद्ध करना अपेक्षाकृत अधिक सरल होता है। कोई भी साहसी या थोड़ा सा भी दुःसाहसी व्यक्ति इसे बहुत थोड़े समय में पूरी कर सकता है। निर्जन श्मशान भूमि में जहां इस प्रकार की प्रेतात्माओं का होना निश्चित होता है, रात के १२ बजे के लगभग जाकर पूर्णतया नग्न होकर मदिरा, मांस और इसी प्रकार के अन्य तामसिक पदार्थों की भेंट लेकर साधक जाता है और पात्र को वहां रख देता है और अपना तान्त्रिक साधन आरम्भ कर देता है। देखते-देखते वह पात्र किसी भी ऊंचे वृक्ष की ओर या आकाश में उड़ कर गायब हो जाता है। और साधक की भेंट प्रेतात्माओं तक पहुंच कर स्वीकृत हो जाती है।

या पात्र के वहां रक्खे-रक्खे हो उसका सारा मद्य मांस गायब हो जाता है। इसी प्रकार कुछ दिनों के साधन के बाद वह प्रेतात्मा जिसे मद्य मांस की भेंट लेने की आदत पड़ चुकी होती है उस साधक के वश में हो जाती है और इन तामसी पदार्थों के लालच में उसकी उचित अनुचित आज्ञा मानने को तत्पर रहती है और अपनी शक्ति भर उसका पालन भी करती है। साधक इस प्रकार की विशेष भेंट उस प्रेतात्मा को अक्सर देता रहता है। होली दिवाली शिवरात्रि प्रति अमावश्या और अन्य विशेष अवसरों पर और यदि किसी कारण नहीं दे पाता तो वह प्रेतात्मा उस साधक की भी बुरी हालत कर देती है। इस भूत प्रेत साधन में बहुत से व्यक्ति भय से पा साधन में अन्य कोई भूल या कमी रह जाने के कारण पागल हो चुके हैं और कितने ही नपनी जान तक खो चुके हैं।

इस तरह भूत प्रेत सिद्ध करने से इतना ही लाभ होता है कि साधक उसके द्वारा दूरदराज से वेमौसम के फल या अन्य वस्तुएं गंगवाकर लोगों को दिखा सकता है, उन्हें प्रयोग में नहीं ला सकता । केवल बाजीगरी दिखाकर चमत्कृत कर सकता है, इनकी सहायता से वह हर किसी की भूत काल की घटनाओं की जानकारी दे सकता है और वर्तमान को भी जान सकता है। इसीलिए कुछ ज्योतिषी कर्णपिशाच की सहायता से जातक की भूतकाल की तथा वर्तमान की सही बातें बताकर उसे प्रभावित कर देते हैं और उससे पर्याप्त धन ऐंठने में सफल हो जाते हैं।

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